सात की कहानी बहुत अनूठी
अगर कभी सोचें ये हम तो सात का है बहुत महत्व...
सात समुद्र इस धरती पर, सात ही हैं आकाश गगन में,
सात अगर फेरे लें हम तो बाँध जाएँ सात जन्मों में...
इन्द्रधनुष के सात रंग हैं, सरगम के भी सात स्वर हैं,
सात रंग और सात स्वर दोनों ही, मेरे जीवन में अन्तरंग हैं
सात रंग जब मिल जातें हैं एकसार वे हो जाते हैं,
सात स्वर आपस में मिलके एक गीत में खो जाते हैं...
रंगों और स्वरों के इस जग में काश यह दूषित हवा न होती,
सुन्दरता और सौम्यता ही यहाँ चहुँ ओर तब होती...
मेरे नाम के भी सात अक्षर हैं,
यदि यह बन जाएँ कुछ रंग और कुछ स्वर तो,
मैं भी इन सम चहुँ ओर कुछ सुन्दरता और सौम्यता बिखेरूं...
सात जो हैं आकाश गगन में, वहां मेरे कुछ प्रियजन रहते हैं
खुश रहो तुम चिरायु हो, मुझसे हरपाल यह कहते हैं...
इस "सात" का रहस्य जो कहूँ तोः... मेरे वो प्रियजन भी "सात" ही हैं... ... ...
Sunday, June 7, 2009
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